القرآن الكريم المصحف الإلكتروني إذاعات القرآن صوتيات القرآن البطاقات الإسلامية فهرس الموقع أوقات الصلاة

अबू बक्र के समयकाल में क़ुरआन को जमा करने एवं उस़मान के दौर में उसे जलाने की क्या कहानी है?

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ुरआन को अपने विभिन्न साथियों के हाथ में विश्वस्त एवं संकलित रूप में छोड़ा, ताकि उसे पढ़ा और दूसरों को पढ़ाया जा सके। फिर जब अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अन्हु- ख़लीफ़ा बने, तो उन्होंने इन बिखरे हुए सहीफ़ों को एक स्थान में जमा करने का आदेश दिया, ताकि उसको स्रोत (reference) के रूप में प्रयोग किया जा सके। फिर जब उसमान -रज़ियल्लाहु अन्हु- का समय आया, तो उन्होंने विभिन्न शहरों में सहाबा के हाथों में विभिन्न शैलियों में मौजूद क़ुरआन की कॉपियों एवं सहीफ़ों को जलाने का आदेश दिया और उनके पास नई कॉपी, जो रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की छोड़ी हुई एवं अबू बक्र के द्वारा जमा की हुई असली कॉपी के अनुरूप थी, उसको भेज दिया। ताकि इस बात की गारंटी रहे कि सभी शहर रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के द्वारा छोड़ी गई एक मात्र असली कॉपी को स्रोत के रूप में इसतेमाल कर रहे हैं।

क़ुरआन बिना किसी बदलाव या परिवर्तन के वैसे ही बना रहा। वह हर ज़माना में हमेशा मुसलमानों के साथ रहा। वे उसको आपस में आदान-प्रदान करते रहे और नमाज़ों में पढ़ते रहे।

PDF