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क्या इस्लाम में पुरोहित (जिन्हें पवित्र समझा जाए कि उनसे गलती नहीं हो सकती) एवं नेक लोग पाए जाते हैं और क्या मुसलमान पैगंबर मुहम्मद के साथियों को पवित्र मानते हैं (इस हद तक कि उनको मध्यस्थ बना लें)?

मुसलमान नेक लोगों और रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथियों के मार्ग पर चलते हैं, उनसे मुहब्बत करते हैं, उन्हीं ही तरह नेक बनने की कोशिश करते हैं और उन लोगों की तरह ही एक अल्लाह की इबादत करते हैं। परन्तु वे उनको पवित्र नहीं मानते हैं और न ही अपने एवं अल्लाह के बीच उनमें से किसी को मध्यस्थ बनाते हैं।

''तथा हममें से कोई किसी को अल्लाह के सिवा रब न बनाए।'' [168] [सूरा आल-ए-इमरान : 64]

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