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सृष्टिकर्ता की इबादत में मध्यस्थों को पकड़ना क्यों हमेशा के लिए जहन्नम ले जाने का कारण बनता है?

जैसा कि प्रसिद्ध है कि मानव रचित संविधान में संप्रभुता के अधिकार या बादशाह के अधिकार से छेड़छाड़ करना दूसरे किसी भी अपराध से बढ़कर है। तो बादशाहों के बादशाह के अधिकार के बारे में आपका क्या ख़्याल है? अल्लाह का अपने बन्दों पर अधिकार है कि वे केवल उसी की इबादत करें, जैसा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : ''अल्लाह का अपने बन्दों पर यह अधिकार है कि वे उसी की इबादत करें और उसके साथ किसी को शरीक (साझी) न करें। और क्या तुम जानते हो कि जब बन्दे ऐसा कर लें, तो अल्लाह पर बन्दों का क्या अधिकार है? (वर्णनकर्ता कहते हैं कि) मैंने कहा : अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं। आपने कहा : बन्दों का अल्लाह पर अधिकार यह है कि वह उनको यातना न दे।''

हमारे लिए बस इतना समझ लेना काफ़ी है कि हम किसी को कोई उपहार दें और वह किसी और का शुक्रिया अदा करे तथा किसी दूसरे की फ्रशंसा करे। हालाँकि अल्लाह के लिए उच्च उदाहरण है, लेकिन यही हाल बन्दों का उनके सृष्टिकर्ता के साथ है। अल्लाह ने उन्हें इतनी सारी नेमतों से नवाज़ा है कि उनकी कोई गिनती नहीं है और वे अल्लाह को छोड़ दूसरे का धन्यवाद करते हैं। हालाँकि सृष्टिकर्ता हर हाल में बेनियाज़ है और उसे बंदों की प्रशंसा तथा शुक्रिया की ज़रूरत नहीं है।

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