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සත්ව අයිතිවාසිකම් සම්බන්ධයෙන් ඉස්ලාමයේ ස්ථාවරය කුමක්ද?

''तथा धरती में न कोई चलने वाला है तथा न कोई उड़ने वाला, जो अपने दो पंखों से उड़ता है, परंतु तुम्हारी जैसी जातियाँ हैं। हमने पुस्तक में किसी चीज़ की कमी नहीं छोड़ी। फिर वे अपने पालनहार की ओर एकत्र किए जाएँगे।'' [253] [सूरा अल-अनआम : 38]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''एक औरत को एक बिल्ली के कारण यातना दी गई, जिसे उसने बाँधकर रखा था, यहाँ तक कि वह मर गई। अतः वह उसके कारण जहन्नम में गई। जब उसने उसे बाँधकर रखा, तो न कुछ खाने को दिया, न पीने को दिया और न ही आज़ाद छोड़ा कि वह स्वयं धरती के कीड़े-मकोड़े खा सकती।'' [254] [सहीह बुख़ारी तथा सहीह मुस्लिम]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "एक आदमी ने एक कुत्ते को देखा कि वह प्यास के मारे (शबनम से भीगी) ज़मीन को चाट रहा है। यह देख उस आदमी ने अपने मोज़े को उतारकर (और उसमें पानी भरकर) उस कुत्ते को पिलाया और उसकी प्यास बुझा दी। इसपर अल्लाह ने उसका धन्यवाद किया और उसको जन्नत में प्रवेश कराया।" [255] (इसे इमाम बुखारी एवं इमाम मुस्लिम ने रिवायत किया है।)

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