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क्या धर्म लोगों के लिए अफीम है?

ब्रह्मांड के निर्माता के अस्तित्व में विश्वास एक प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी है। विश्वास विवेक को सचेत करता है और मोमिन को अपने हर बड़े और छोटे काम के लिए खुद की समीक्षा करने पर उभारता है। मोमिन ज़िम्मेदार होता है अपने आपका, अपने परिवार का, अपने पड़ोसी का, यहाँ तक कि मुसाफिर का भी। वह साधनों को अपनाता है और अल्लाह पर भरोसा करता है। मैं नहीं समझता हूँ कि ये अफीम के नशेड़ियों की विशेषताएँ हैं। [43] अफीम एक मादक पदार्थ है, जिसे खसखस के पौधे से निकाला जाता है और हेरोइन बनाने के लिए उसका इस्तेमाल होता है।

लोगों के लिए वास्तविक अफीम आस्था नहीं, बल्कि नास्तिकता है। क्योंकि नास्तिकता अपने अनुयायियों को भौतिकवाद, सृष्टिकर्ता से अपने संबंध के बारे में न सोचने, धर्म का इंकार करने तथा जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का परित्याग करने की ओर बुलाती है। इसी प्रकार यह अंजाम से बेख़बर होकर केवल वर्तमान में जीने को कहती है। यानी लोगों का जो मन चाहे करें बिना इस विश्वास के कि उनपर कोई अल्लाह का रखवाला या उनके कामों का हिसाब रखने वाला निर्धारित है या उनको दोबारा जीवित होकर उठना है और हिसाब-किताब के मरहले से गुज़रना है। क्या वास्तव में यह नशेड़ियों की विशेषता नहीं है?

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