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प्रश्न 11: सूरा अल-कौस़र पढ़ें और उसकी व्याख्या करें?

उत्तर- सूरा अल-कौस़र और उसकी तफ़सीर:

अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दयालु है।

(हे नबी!) ''हमने तुम्हें कौस़र प्रदान किया है। अपने रब के लिये नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो। निःसंदेह तुम्हारा शत्रु ही बे नाम व निशान है''। [सूरा अल-कौस़र: 1-3]

तफ़सीर (व्याख्या):

1- ''इन्ना अअ्त़ैनाक्ल-कौस़र'' (ऐ रसूल) हमने आपको ढेर सारी भलाई प्रदान की है, और उसी में से एक जन्नत में कौस़र नामक नहर भी है।

2- ''फ़स़ल्लि लि रब्बिका वन्ह़र'' अतः आप इस नेमत पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए केवल उसी के लिए नमाज़ पढ़िए और क़ुर्बानी कीजिए; मुश्रिकों के प्रचलन के विपरीत जो अपनी मूर्तियों की निकटता प्राप्त करने के लिए बलि देते हैं।

3- ''इन्ना शानिअका हुवल अब्तर'', अर्थात, निःसंदेह आपसे द्वेष रखने वाला ही हर भलाई से वंचित और भुलाया हुआ है, जिसे यदि याद भी किया जाता है, तो बुराई के साथ याद किया जाता है।