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प्रश्न 3: सूरा अल-आदियात पढ़ें और उसकी व्याख्या करें?

उत्तर- सूरा अल-आदियात और उसकी तफ़सीर:

अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दयालु है।

उन घोड़ों की शपथ जो दौड़ कर हाँफ जाते हैं। फिर पत्थरों पर टाप मार कर चिंगारियाँ निकालने वालों की शपथ। फिर प्रातः काल में धावा बोलने वालों की शपथ। जो (अपनी दौड़ के द्वारा) धूल उड़ाते हैं। फिर सेना के बीच घुस जाते हैं। वास्तव में, इन्सान अपने रब का बड़ा कृतघ्न (नाशुकरा) है। निश्चित रूप से, वह इसपर स्वयं साक्षी (गवाह) है। और बेशक वह धन से बड़ा प्रेम रखता है। क्या वह उस समय को नहीं जानता, जब क़ब्रों में जो कुछ है, निकाल लिया जायेगा? और सीनों के भेद प्रकाश में लाये जायेंगे? निश्चय उनका रब उस दिन उनसे पूर्ण रूप से सूचित होगा। [सूरा अल-आदियात: 1-11]

तफ़सीर (व्याख्या):

'वल आदियाति ज़ब्हन'', अल्लाह ने इस आयत में उन घोड़ों की क़सम खाई है, जो दौड़ते हैं, यहाँ तक कि उनके तेज़ दौड़ने के कारण उनकी साँसों की आवाज़ सुनाई देती है।

2- ''फलमूरियाति क़द्हन'', और उन घोड़ों की क़सम खाई है, जिनके खुर जब चट्टानों पर तेज़ी से पड़ते हैं, तो उनसे चिंगारियाँ निकलती हैं।

3- ''फलमुग़ीराति स़ुब्हन'', फिर उन घोड़ों की क़सम खाई है जो स़ुबह के समय दुश्मनों पर हमला बोल देते हैं।

4- ''फ़अस़र्ना बिहि नक़अन'', और उनके दौड़ने के कारण धूल उड़ते हैं।

5- ''फ़वसत़्ना बिहि जम्अन'', अर्थात: वह दुश्मनों की पंक्तियों में घुस जाते हैं।

6- ''इन्नल इंसाना लिरब्बिही लकनूद'', अर्थात: इंसान अपने पालनहार का बड़ा कृतघ्न है, वह उस भलाई का इंकार करता है जो उसका रब उससे चाहता है।

7- ''व इन्नहु अला ज़ालिका ल शहीद'', वह स्वयं इस पर गवाह है कि वह भलाई से रोकने वाला है, उसके स्पष्ट होने के कारण वह उसका इंकार कर ही नहीं सकता।

8- ''व इन्नहु लि हुब्बिल ख़ैरि ल शदीद'', वह धन व माल को अत्यधिक चाहने के कारण उसमें कंजूसी से काम लेता है।

9- ''अफ़ला यअ्लमु इज़ा बुअ्स़िरा मा फिल क़ुबूरि'', अर्थात: क्या सांसारिक जीवन के धोखे में पड़ा हुआ यह इनसान नहीं जानता, जब अल्लाह क़ब्रों में मौजूद मुर्दों को पुनर्जीवित करेगा और उन्हें हिसाब और बदले के लिए ज़मीन से बाहर निकालेगा कि मामला वैसा नहीं था, जैसा उसने समझ रखा था?!

10- ''व हुस़्स़िला मा फिस़्स़ुदूर'', अर्थात दिलों में नियतों, विश्वासों तथा आस्थाओं आदि में से जो कुछ है सब जग जाहिर हो जाएंगे।

11- ''इन्ना रब्बहुम बिहिम यौमइज़िन ल ख़बीर'', निश्चय उनका रब उस दिन उनकी पूरी खबर रखने वाला है, उससे उसके बंदों की कोई बात छिपी नहीं है और वह उन्हें उसका बदला देगा।