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प्रश्न 26: सवार होने की क्या दुआ है?

उत्तर- बिस्मिल्लाहि, वल्ह़म्दुलिल्लाहि ((सुबहानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़रिनीन, व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून)), ''अल्ह़म्दुलिल्लाहि, अल्ह़म्दुलिल्लाहि, अल्ह़म्दुलिल्लाहि, अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, सुब्ह़ानकल्लाहुम्मा इन्नी ज़लम्तु नफ़्सी फ़ग़्फ़िर ली, फ़इन्नहु ला यग़्फ़िरुज़ ज़ुनूबा इल्ला अन्ता'' (शुरू अल्लाह के नाम से, सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए, ((पाक है वह ज़ात जिसने हमारे लिए इसको वश में किया, वरना हम इसको क़ाबू में नहीं कर सकते थे, और हम सबको हमारे रब की तरफ ही लौट कर जाना है)), सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है,, हे अल्लाह पाक है तेरी ज़ात, मैं ने अपने आप पर अत्याचार किया है, तू मुझे क्षमा कर दे, इस लिए कि तेरे अलावा कोई अन्य गुनाहों को क्षमा नहीं कर सकता है)। इस हदीस को अबू दावूद और तिरमिज़ी ने रिवायत किया है।